Aansu Shayari | Aansu Shayari in Hindi- आँसू शायरी

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aansu shayari in hindi
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aansu ki kimat shayari

निकल जाते हैं तब आँसू जब उनकी याद आती है
जमाना मुस्कुराता है मोहब्बत रूठ जाती है

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है
ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता

शायद तू कभी प्यासा फिर मेरी तरफ लौट आये
आँखों में लिए फिरता हूँ दरिया तेरी खातिर

जाहिर नहीं करता पर मैं रोज रोता हूँ
शहर का दरिया मेरे घर से निकलता है

उस अश्क की तासीर से अल्लाह बचाये
जो अश्क आँखों में रहे और न बरसे

aansu shayari in hindi
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जो आँसू आँख से अचानक निकल पड़ें
वजह उनकी ज़बान से बयां नहीं होती

देगा अगर दर्द तो खुद भी डूबेगा
वो एक शख्स जो आँखों में रहता है

अजीब कहर पड़ा अब के साल अश्कों का
कि आँख तर ना हुई खूं में नहा कर भी

तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको
आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं

आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए
गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए

कमजोर हुए अश्कों से घर के दरो-दीवार
रोने के लिये लेंगे किराए का मकाँ और

aansu shayari 2 lines

aansu shayari in hindi
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ये सानेहा भी मोहब्बत में बार-हा गुजरा
कि उस ने हाल भी पूछा तो आँख भर आई

बहना कुछ अपनी चश्म का दस्तूर हो गया
दी थी खुदा ने आँख पर नासूर हो गया

पिरो दिये मेरे आँसू हवा ने शाखों में
भरम बहार का वाकी रहा आँखों में

वहाँ से पानी की एक बूँद भी न निकली
तमाम उम्र जिन आँखों को झील लिखते रहे

चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी
आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी

बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़
कभी बादलों से तो कभी आँखों से

aansu shayari
aansu shayari

मुझे मालूम है तुमने बहुत बरसात देखी है
मगर मेरी इन्हीं आँखों से सावन हार जाता है

लगता है मैं भूल चुका हूँ मुस्कुराने का हुनर
कोशिश जब भी करता हूँ आँसू निकल आते हैं

तैयार रहते हैं आँसू मेरी पलकों पे अक्सर
तेरी यादों का कोई वक़्त मुक़र्रर जो नहीं है

अश्क़ ही मेरे दिन हैं अश्क़ ही मेरी रातें
अश्कों में ही घुली हैं वो बीती हुयी बातें

dard bhari aansu shayari

aansu ki kimat shayari
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किसी को बताने से मेरे अश्क़ रुक ना पायेंगे
मिट जायेगी जिंदगी मगर ग़म धुल न पायेंगे

एक आह पे मेरी गिरते थे जिनके हजारो आँसू
आज वो भी मेरे ज़ख्मों पे मुस्कुराने लगे

जब भी गुजरे हुए लम्हों की याद आएगी
होंठ सी लूँगा मगर आँख तो भर आएगी

राह तकते हुए जब थक गई मेरी आँखें
फिर तुझे ढूँढने मेरी आँख के आँसू निकले

काश आँसुओ के साथ यादें भी बह जाती
तो एक दिन तसल्ली से बैठ कर रो लेते

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क.
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

aansu shayari
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मेरी आँखों में आँसू नहीं बस कुछ नमी है
वजह तू नहीं बस तेरी ये कमी है

क्यूँ बदला हुआ है आज मेरे आँसुओ का रंग
क्या दिल के ज़ख्म का कोई टाँका उधड़ गया

एक तमन्ना जगी है इस मायूस दिल में आज
आँसू के साथ हर एक ख्वाब भी बह जाए

हंसने की जुस्तजू में दबाया जो दर्द को
आँसू हमारी आँख में पत्थर के हो गए

aansu shayari facebook
aansu shayari
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क्या लिखूं दिल की हकीकत आरजू बेहोश है
ख़त पे आँसू बह रहे हैं और कलम खामोश है

जब्त-ए-गम कोई आसान काम नहीं फराज
आग होते है वो आँसू जो पिए जाते हैं

मेरे दिल में न आओ वर्ना डूब जाओगे
गम के आँसू का समंदर है मेरे अन्दर

खामोश रहने दो लफ़्ज़ों को
आँखों को बयाँ करने दो हकीकत
अश्क जब निकलेंगे झील के
मुक़द्दर से जल जायेंगे अफसाने

मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है
ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है
देकर वो आपकी आँखों में आँसू
अकेले में आपसे ज्यादा रोता है

सदफ की क्या हकीकत है अगर उसमें न हो गौहर
न क्यों कर आबरू हो आंख की मौकूफ आंसू पर

aansu ki kimat shayari
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तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे
अब आँख भर आती है पर तुम नज़र नहीं आते​

हमें क्या पता था ये मौसम यूँ रो पड़ेगा
हमने तो आसमां को बस अपनी दास्ताँ सुनाई है

कौन कहता है कि आंसुओं में वज़न नहीं होता
एक भी छलक जाए तो मन हल्का हो जाता है

क्या कहूँ दीदा-ए-तर ये तो मेरा चेहरा है
संग कट जाते हैं बारिश की जहाँ धार गिरे

मेरे दिल में न आओ वरना डूब जाओगे
ग़म-ए-अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं अंदर
अगर एक बार रिसने लगा जो पानी
तो कम पड़ जायेगा भरने के लिए समंदर

aankho me aansu hindi shayari
aansu ki kimat shayari
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हर एक मुस्कुराहट मुस्कान नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत आसान नहीं होती
आँसू गम के और ख़ुशी के होते हैं एक जैसे
इन आँसुओं की कोई पहचान नहीं होती

प्यार कर के कोई जताए ये ज़रूरी तो नहीं
याद कर के कोई बताये ये ज़रूरी तो नहीं
रोने वाले तो दिल में ही रो लेते हैं अपने
कभी आँख में आसूं आये ये ज़रूरी तो नहीं

वापसी का सफ़र अब न मुमकिन होगा
हम निकल चुके हैं आँख से आँसू की तरह

उसका अक्स आँखों में इस कदर बसा है
बरसों आँसू बहे मगर तसवीर न धुली

रोने वाले तो दिल में ही रो लेते हैं
आँखों में आँसू आयें ये ज़रूरी तो नहीं

इत्तिफ़ाक़ समझो या मेरे दर्द की हकीक़त
आँख जब भी नम हुई वजह तुम ही निकले

aankhon mein aansu shayari
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पलकों के बंध तोड़ के दामन पे गिर गया
एक अश्क मेरे ज़ब्त की तौहीन कर गया

हमें आँसुओं से ज़ख्मों को धोना नहीं आता
मिलती है ख़ुशी तो उसे खोना नहीं आता
सह लेते हैं हर ग़म को जब हँसकर हम
तो लोग कहते है कि हमें रोना नहीं आता

क्या आये तुम जो आये घड़ी दो घड़ी के बाद
सीने में होगी सांस अड़ी दो घड़ी के बाद
क्या रोका अपने गिर्ये को हम ने कि लग गयी
फिर वही आँसुओं की झड़ी दो घड़ी के बाद

मुझको रुला कर दिल उसका रोया तो होगा
उसकी आँखों में भी आँसू आया तो होगा
अगर न किया कुछ भी हासिल हमने प्यार में
कुछ न कुछ उसने भी खोया तो होगा

देख उनको चश्म-ए-नम
मैं खुश हुआ हूँ आज यूँ
है अभी उम्मीद-ए-उल्फत
कायम अपने दरमियां

gam ke aansu shayari
aansu shayari
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सलीका हो अगर भीगी हुई
आँखों को पढ़ने का
तो फिर बहते हुए आँसू भी
अक्सर बात करते हैं

जिसे ले गई है अभी हवा
वो वरक़ था दिल की किताब का
कहीं आँसुओं से मिटा हुआ
कहीं आँसुओं से लिखा हुआ

वो नदियाँ नहीं आंसू थे मेरे
जिस पर वो कश्ती चलाते रहे
मंजिल मिले उन्हें यह चाहत थी मेरी
इसलिए हम आंसू बहाते रहे

आगोश-ए-सितम में छुपाले कोई
तन्हा हूँ तड़पने से बचा ले कोई
सूखी है बड़ी देर से पलकों की जुबां
बस आज तो जी भर के रुला दे कोई

इतना तो ज़िंदगी में किसी की खलल पड़े
हँसने से हो सुकून ना रोने से कल पड़े
मुद्दत के बाद उसने जो की प्यार की निगाह
जी खुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े

aankhon mein aansu shayari
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आँखों में आंसुओं की लकीर बन गयी
जैसी चाही थी वैसी ही तकदीर बन गयी
हमने तो सिर्फ रेत में ऊँगली चलाई थी
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी

आँखों में कौन आ के इलाही निकल गया
किस की तलाश में मेरे अश्क़ रवां चले

कम नहीं हैं आँसू मेरी आँखों में मगर
रोता नहीं कि उनमें उसकी तस्वीर दिखती है

वापसी का सफ़र अब मुमकिन न होगा
हम तो निकल चुके हैं आँख से आँसू की तरह

आँसू भी मेरी आँख के अब खुश्क हो गए
तू ने मेरे खुलूस की कीमत भी छीन ली

aansu shayari
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तेरी मुस्कराहट तेरे कहकहे किसी और के थे
जो तेरी आँखों से था टपका वो मैं था

आया ही था खयाल कि आँखें छलक पड़ीं
आँसू किसी की याद के कितने करीब हैं

घास में जज़्ब हुए होंगे ज़मीं के आँसू
पाँव रखता हूँ तो हल्की सी नमी लगती है

इनको न कभी आँख से गिरने देता हूँ मैं
उनको लगते हैं मेरी आँख में प्यारे आँसू

मेरा शहर तो बारिशों का घर ठहरा
यहाँ की आँख हों या दिल बहुत बरसते हैं

देख सकता है भला कौन ये प्यारे आँसू
मेरी आँखों में न आ जाएँ तुम्हारे आँसू

आँसू कभी पलकों पर बहुत देर नहीं रुकते
उड़ जाते हैं पंछी जब शाख़ लचकती है

वो अश्क बन के मेरी चश्म-ए-तर में रहता है
अजीब शख़्स है पानी के घर में रहता है

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे
वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है

पलकों से पानी गिरा है तो उसे गिरने दो
सीने में कोई पुरानी तमन्ना पिघल रही होगी

इनको न कभी आँख से गिरने देता हूँ
उनको लगते हैं मेरी आँख में प्यारे आँसू

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क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता
आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता

ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी
जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके

आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम
ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम

साथ बिताई तेरे संग वो
शाम सुहानी जिंदा है
होंठ भले ही सूखे हों
पर आँख मे पानी जिंदा है

तेरे ना होने से ज़िंदगी में
बस इतनी सी कमी रहती है
मैं लाख मुस्कुराऊँ फिर भी
इन आँखों में नमी रहती है

जिनके प्यार बिछड़े है
उनका सुकून से क्या ताल्लुक़
उनकी आँखों में नींद नहीं
सिर्फ आँसू आया करते है

कभी बरसात का मज़ा चाहो
तो इन आँखों में आ बैठो
वो बरसों में कभी बरसती है
ये बरसों से बरसती हैं

सोचा ही नहीं था जिंदगी में ऐसे भी फसाने होंगे
रोना भी जरुरी होगा आँसू भी छुपाने होंगे

हर बात पर नम हो जाती हैं आँखें मेरी अक्सर
जहाँ भर के अश्क खुदा मेरी पलकों में रख भूला

लिखना तो था कि खुश हूँ तेरे वगैर भी
आँसू मगर कलम से पहले ही गिर पड़े

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था
मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे

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न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे
हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं

फिर आज आँसुओं में नहाई हुई है रात
शायद हमारी तरह ही सताई हुई है रात

जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो.
जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं

बहुत अजीब हैं तेरे बाद की ये बरसातें भी
हम अक्सर बन्द कमरे में भीग जाते हैं

तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है
रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता

प्यास बुझ जाये ज़मीं सब्ज़ हो मंज़र धुल जाये
काम क्या क्या न इन आँखों की तरी आये है

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की
जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई

अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू
अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने

 

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